April 20, 2026

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Bengal Waqf Violence: ममता के बंगाल में वक्फ कानून पर बवाल, मुर्शिदाबाद में 3 की दर्दनाक मौत, 138 अरेस्ट; सड़कों पर पैरा मिलिट्री तैनात

Bengal Waqf Violence: कोलकाता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में पैरामिलिट्री बलों की तैनाती का आदेश दिया. तोड़फोड़ की घटनाओं को अनदेखा नहीं कर सकते, हाल ही में अदालत ने ऐसा निर्देश दिया है. मंगलवार को शुक्रवार की नमाज के बाद शुरू हुई हिंसा का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा.

पुलिस ने शनिवार को बताया कि कम से कम तीन लोग मारे गए हैं और 138 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.  राज्य के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि बंगाल में हिंदू ‘सुरक्षित नहीं’ हैं, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शांति की अपील करते हुए कहा कि ‘कुछ राजनीतिक पार्टियां’ धर्म का ‘राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग’ करने की कोशिश कर रही हैं.

केंद्रीय बलों की तैनाती

मुरशीदाबाद में पहले से मौजूद करीब 300 बीएसएफ जवानों के अलावा राज्य सरकार की मांग पर 5 और कंपनियों को तैनात किया गया है. कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद, पैरामिलिट्री बलों को सुठी और शमशेरगंज जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया. केंद्रीय बलों ने रात भर प्रभावित क्षेत्रों में गश्त की और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की.

‘यह सिर्फ एक ट्रेलर है…’

इंडिया टुडे टीवी से बातचीत करते हुए कई स्थानीय निवासियों ने कहा कि पुलिस घटनास्थल पर नजर नहीं आई जब शुक्रवार की हिंसा ने जिले को बुरी तरह प्रभावित किया. एक स्थानीय निवासी सुजीत घोषाल ने कहा, ‘यह सिर्फ एक ट्रेलर है. असली फिल्म तो अब शुरू होगी. हम यहां रात 11 बजे तक थे, लेकिन प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि नजर नहीं आया. अभी भी कोई नहीं है.’ धुलियन में एक अन्य स्थानीय व्यक्ति, जिसकी दुकान को तोड़ा गया, ने कहा, ‘मेरी पत्नी और बच्चे डर में थे. उन्होंने मुझसे बाहर न जाने को कहा. पिताजी, बाहर मत जाइए.’

ममता बनर्जी की ‘असफलता’

भाजपा नेता ने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वक्फ बिल को लेकर हिंसा में हिंदुओं को निशाना बनाया गया. धुलियान में हिंदुओं की दुकानों में लूटपाट हुई, 35 पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन ममता बनर्जी तुष्टीकरण की राजनीति में व्यस्त हैं.

अदालत का आदेश

कोलकाता उच्च न्यायालय ने मुरशीदाबाद में पैरामिलिट्री बलों की तैनाती का आदेश दिया, ताकि हिंसा को नियंत्रित किया जा सके और प्रभावित इलाकों में शांति स्थापित की जा सके. हालांकि, कई स्थानीय लोग अभी भी पुलिस की अनुपस्थिति को लेकर गुस्से में हैं और उनका मानना है कि प्रशासन ने देर से कार्रवाई की है.

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